My Oil Painting

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भोर की पहली किरण मन से मनव्योम तक ---- http://bhorkipehlikiran.blogspot.com/

शुक्रवार, 2 अप्रैल 2010

My Photography


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रंगां सूं रंगीन बणाती
इण  प्रकरति नै
सूझी इक  कुचमाद
भर  ल्याई रंग
 अर रच्या  रेखाचितराम !

3 टिप्‍पणियां:

  1. Are wah! Kya gazab hai! Aapko mere ek blog ka link deti hun..shayad pasand aaye...Yah "Fiber Art" ke tahat aata hai...jo karnewali Bharat me mai akeli hun! Prateeksha rahegi!

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  2. http://fiberart-thelightbyalonelypath.blogspot.com/
    Yah link hai!

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  3. कोई बात केवन सारु गढ़ना पड़े केई बिम्ब ने उप्मावा. अर लेवनो पड़े सब्दा रो सायरो. दोदाव्ना पड़े कल्पनावा रा अलेखू घोडा, फेर भी चूक व्हे जावे. पण चितराम तो मूंडे बोलता ही चुगली करे. जिस्सो देखे बिस्सो ही मतोमत ही खरी-खरी खलका देवे. उन ने किनी सायरे री जरूत कोनी. सो आपरा एई चितराम नी, दूजा चितराम भी घणा फूटरा ने मन-मोव्णा है. आस राखु के आपरो स्होक इणी भान्त फलतो-फूल्तो रेवे ने म्हाने भान्त-भंतीला चितराम देखण सारु मिलता रेवे. आपने इण सारु घणा-घणा रंग ने लखदाद

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