My Oil Painting

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My Oil Painting

और भी कुछ रचा है यहाँ

भोर की पहली किरण मन से मनव्योम तक ---- http://bhorkipehlikiran.blogspot.com/

बुधवार, 24 फ़रवरी 2010

मेरी फोटोग्राफी,

सगळा जातरू चाल्या !!!!


सोमवार, 22 फ़रवरी 2010

मेरी फोटोग्राफी,

 
इक सपना कबसे मन में में पले
टेकरी पर आशियां हो नीले आसमां तले
नज़र उठाऊं पंछी दिखे 
नज़र झुकाऊ कोंपल खिले 
रात दमके तारों तले 
दिन ज्यूँ किरण खिले !

ऐतिहासिक स्थान

अहमदाबाद स्थित सिद्दी की मस्जिद  के कुछ दृश्य .

शनिवार, 20 फ़रवरी 2010

मेरी फोटोग्राफी

सूरज कुछ ऐसे कहता है 
अपनी बात 
कभी तरु कभी धरा 
कभी बादल की लेता छाँव !

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

मेरी फोटोग्राफी

इस हंसी से बढ़कर कुछ है क्या!!!??

मेरी फोटोग्राफी


फोटो

सावधानी रखी            फिर भी    दुर्घटना   घटी !  

सोमवार, 15 फ़रवरी 2010

ऐतिहासिक स्थान

 भाद्राजून (जालोर) की कलात्मक  छत्रिया . इन छत्रिया में कुछ 18 ,कुछ १४. कुछ 12
और अन्य १० खम्बो वाली है.हर एक में बारीक कारीगरी की गई है,

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

राजस्थान का लोक नृत्य

 राजस्थान  का लोक नृत्य चरी  जिसमें कलाकार       एक के बाद एक कलश   या चरी की संख्या बढाते हुये लोक  गीत पर नृत्य प्रस्तुत करता है। इसी बीच  वह  परात,    तलवार, कांच की किरचों     पर नृत्य करता हुआ अनूठा उदाहरण  प्रस्तुत करता है कि उसका संतुलन देख कर     दर्शक दांतों तले अगुंली दबा लेते है।
इस  नृत्य में बहुत अधिक  अभ्यास  व ध्यान की आवश्यकता होती है।

रविवार, 7 फ़रवरी 2010

My Photography


 बच्चे है कुछ भी कर सकते है!!!!!!!!!


मारवाड़  में प्रचलित बैलगाड़ियों के प्रकार जो अब केवल संग्रहालयों में बचे है। इन्हें छकड़ी भी कहा जाता है।

My Photography


शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2010

स्थान


जिला फोंडा (गोवा ) में  स्थित  यह स्थान दूध सागर कहलाता है  जो  अभयारण्य में स्थित  है।  सफेद  दूध जैसा फेनिल पानी निर्मल एहसास जगाता है।
 यहां दिखाई देने वाला यह रेल पुल अंग्रेजों   के समय का बना हुआ  है।

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2010

ऐतिहासिक स्थान

 मंगेशपुर  (गोवा) के पास के एक गांव की हवेली। इस इलाके के कई गांवों में अग्रंेजो ने ऐसी उस समय की तमाम सुख सुविधायुक्त हवेलियां उनको दी जिन्होंने उनकी अधीनता स्वीकार कर उनके लिये लगान व कचहरी का काम करना स्वीकार किया। उनको वो गांव दे दिया गया। उन्हीं हवेली में से एक को अब संग्रहालय रुप में खोला गया है।  
उसी के यह चित्र है।  
इनमें लगभग   दो सौ साल पुरानी वस्तुएं है।
इडली बनाने के बर्तन ।
मांस रक्षण
पलंग
भोजन कक्ष
आभूषण रखने का
पालकी
रेडियो


 

बुधवार, 3 फ़रवरी 2010